प्रभा खेतान की "स्त्री उपेक्षिता" , द सेकेंड सेक्स किताब का हिंदी रूपांतरण

” स्त्री पैदा नहीं होती वरन बना दी जाती है”
बी.ए. (Hons.) प्रथम वर्ष, GE- Ethics in Public Domain कोर्स में एक टॉपिक लेखिका सिमोन द बउआर(
 Simone De Beauvoir)   द्वारा  लिखित “द सेकेंड सेक्स”  वॉल्यूम 2 का 5वाँ पाठ ” The Married Woman” है। प्रभा खेतान की “स्त्री उपेक्षिता” ,  द सेकेंड सेक्स किताब का हिंदी रूपांतरण है। छात्र इस पुस्तक को ना सिर्फ अपने कोर्से सम्बंद्धी पाठ पढ़ने के लिये उपयोग कर सकते हैं, वरन नारीवाद को समझने के लिये एक बेहतरीन पुस्तक है। 

 पुस्तक और अनुवादिका के बारे में संक्षिप्त जानकारी https://hi.unionpedia.orgसे

सेकेंड सेक्स (The Second Sex) सिमोन द बउआर द्वारा फ्रेंच में लिखी गई पुस्तक है जिसने स्त्री संबंधी धारणाओं और विमर्शों को गहरे तौर पर प्रभावित किया है। स्त्री अधिकारवादी विचारधारा वाली सिमोन की यह पुस्तक नारी अस्तित्ववाद को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करती है। यह स्थापित करती है कि स्त्री जन्म नहीं लेती है बल्कि जीवन में बढ़ने के साथ बनाई जाती है। उनकी यह व्याख्या हीगेल के सोच को ध्यान में रखकर “दूसरा” (the Other) की संकल्पना प्रदान करती है। उनकी इस संकल्पना के अनुसार, नारी को उसके जीवन में उसकी पसंद-नापसंद के अनुसार रहना और काम करने का हक़ होना चाहिए और वो पुरुष से समाज में आगे बढ़ सकती है। ऐसा करके वो स्थिरता से आगे बढ़कर श्रेष्ठता की ओर अपना जीवन आगे बढ़ा सकतीं हैं। ऐसा करने से नारी को उनके जीवन में कर्त्तव्य के चक्रव्यूह से निकल कर स्वतंत्र जीवन की ओर कदम बढ़ाने का हौसला मिलता हैं। दूसरा लिंग एक ईएसआई पुस्तक है, जो यूरोप के सामाजिक, राजनैतिक, व धार्मिक नियमो को चुनौती देती हैं, जिसने नारी अस्तित्व एवं नारी प्रगति में हमेशा से बाधा डाली है और नारी जाती को पुरुषो से नीचे स्थान दिया हैं। अपनी इस पुस्तक में में बेऔवौर पुरुषों के ढकोसलों से नारी जाती को लाद कर उनके जीवन में आयी बढायो पर सोच न करने की नीति के विषय में अपने विचार प्रदान किये हैं। 

प्रभा खेतान

डॉ प्रभा खेतान डॉ॰ प्रभा खेतान (१ नवंबर १९४२ – २० सितंबर २००८) प्रभा खेतान फाउन्डेशन की संस्थापक अध्यक्षा, नारी विषयक कार्यों में सक्रिय रूप से भागीदार, फिगरेट नामक महिला स्वास्थ्य केन्द्र की स्थापक, १९६६ से १९७६ तक चमड़े तथा सिले-सिलाए वस्त्रों की निर्यातक, अपनी कंपनी ‘न्यू होराईजन लिमिटेड’ की प्रबंध निदेशिका, हिन्दी भाषा की लब्ध प्रतिष्ठित उपन्यासकार, कवयित्री तथा नारीवादी चिंतक तथा समाज सेविका थीं। उन्हें कलकत्ता चैंबर ऑफ कॉमर्स की एकमात्र महिला अध्यक्ष होने का गौरव प्राप्त था। वे केन्द्रीय हिन्दी संस्थान की सदस्या थीं।

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राजा जनक और सुलभा संवाद

नारीवादी लेखिका रूथ वनिता ने अपने आलेख ‘आत्मा का कोई लिंग नहीं होता'(the self is not gendered) में अपनी बात हिन्दू मान्यता में प्रचलित पुराणिक कथाओं और भारतीय दर्शन के वेदांत स्कूल की विचारधारा के माध्यम से कही है।राजा जनक और सुलभा संवाद कहानी का आलेख में उसी संदर्भ में उपयोग है। रूथ वनिता का आलेख पढ़ने से पहले पाठक को यह कहानी एक बार पढ़ लेना और समझ लेना जरुरी हो जाता है।

Is there a feminists method? Sandra Harding

क्या कोई नारीवादी शोध प्रविधि / पद्धति (फेमिनिस्ट मेथड ) है?-सैंड्रा हार्डिंग

BA.(H), 3rd semester, GE, Feminism