मिलिन्द – प्रश्न

सम्राट मीनान्डर और नागसेन का यह प्रसिद्ध संवाद सागलपुर ( वर्तमान स्यालकोट ) मे हुआ था जो उस समय सम्राट मीनान्डर की राजधानी थी । इस ग्रंथ मे राजा मिनान्डर ने भिक्खु नागसेन से अनेक ऐसे प्रशन पूछॆ है जो सीधे मनुष्य के मनोविज्ञान से संबध रखते हैं’मिलिन्द प्रशन ’ में भिक्षु नागसेन ने बुद्धContinue reading “मिलिन्द – प्रश्न”

जैन दर्शन में अहिंसा का सिद्धांत

जैन शास्त्रों में अहिंसा जैन धर्म के मूलमंत्र में ही अहिंसा परमो धर्म: – अहिंसा परम (सबसे बड़ा) धर्म कहा गया है। आधुनिक काल में महात्मा गांधी ने भारत की आजादी के लिये जो आन्दोलन चलाया वह काफी सीमा तक अहिंसात्मक था। जैन धर्म में सब जीवों के प्रति संयमपूर्ण व्यवहार अहिंसा है। अहिंसा काContinue reading “जैन दर्शन में अहिंसा का सिद्धांत”

भारतीय दर्शन में चेतना का सिद्धान्त ( Indian Theories of Consciousness)

INDIAN THEORIES OF CONSCIOUSNESS CBCS, Delhi University, B. A. (HONS.) (DISCIPLINE SPECIFIC COURSE) 6th Semester यूनिट के प्रत्येक टॉपिक को हिन्दी में पढ्ने के लिये, टॉपिक के बाद दिये लिंक पर क्लिक करें। UNIT-I  1. Kaṭhopaniṣad: Chapter. 1 Valli I, II & III; Kaṭhopaniṣad in “Ekadasepansodan”. Ed. by V. S. Sastri, Motilal Banarsidas, Delhi, 1966. कथाContinue reading “भारतीय दर्शन में चेतना का सिद्धान्त ( Indian Theories of Consciousness)”

अर्थक्रियाकारित्व

बौद्ध दर्शन अनुसार अर्थक्रियाकारित्व किसी वस्तु की सत्ता का लक्षण है ‘अर्थक्रियाकारित्व’ अर्थात् किसी कार्य को उत्पन्न करने की शक्ति अर्थात् कार्योत्पादन सामर्थ्य वर्तमान भूत से जन्य या उत्पन्न है अर्थात् भूत वर्तमान को उत्पन्न करने में शक्त या समर्थ है।बौद्धों ने सत्ता का यह लक्षण क्षणिकता की सिद्धि के लिए किया है। • ज्ञानContinue reading “अर्थक्रियाकारित्व”

धर्मकीर्ति विरचित न्याय बिन्दु

Text of Indian Philosophy, B.A. (Hons) Philosophy, 4th semester, Delhi University न्यायबिन्दु के विषय सम्यक् प्रमाण का महत्व, उसके लक्षणों का विवेचन। Audio- Preeti Jain https://drive.google.com/file/d/1QbRHgsGVACcR3FZ5q6VBjW84WM6yhT18/view?usp=drivesdk

धर्मकीर्ति विरचित न्यायबिन्दु

B.A. (Hons) Philosophy, 4th semester, DUप्रमा, प्रमाण, प्रमेय, प्रमाता, सम्यक् ज्ञान की हिन्दी में व्याख्या- प्रीति जैन https://drive.google.com/file/d/1QNGqSUaAgsbhhRN45HiM4Qfj5ZQbN3ni/view?usp=drivesdk

जैन दर्शन में योग B.A.(P), 4th semester, SEC- Yoga Philosophy

जैन दर्शन में योग के सिद्धांत को समझने के लिए इंटरनेट पर उपलब्ध सहायक सामग्रीविडियो-1* ‘Yoga in Jainism’ part of the film “History of Yoga”जैन धर्म में योग ( फिल्म “योग का इतिहास” का एक अंश)https://youtu.be/pgpVGWOJuk0 2* “शंका समाधान” प्रोग्राम में जैन मुनि प्रमाणसागर जी द्वारा “जैन दर्शन में  योग व ध्यान”  से संबंधित प्रश्न का आगम समत्तContinue reading “जैन दर्शन में योग B.A.(P), 4th semester, SEC- Yoga Philosophy”

मार्टिन हेडेगर (पाठ-8,पुस्तक- अस्तित्ववाद,लेखक-डॉ हृदयनारायण मिश्र एवं श्री प्रतापचन्द्र शुक्ल प्रकाशक-किताबघर,कानपुर, 1968)

यह पुस्तक केंद्रीय पुस्तकालय,दिल्ली विश्वविद्यालय में उप्लब्ध है । विद्यार्थी इसे अपने B.A. (Hons) Philosophy, 2nd year, Text of Western Philosophy पेपर के लिये एक हेल्प है बुक की तरह प्रयोग कर सकते हैं।

दर्शन शास्त्र पर हिन्दी में व्याख्यान

कई बार कोशिशें नहीं होती और कई बार की गयी कोशिश और उसके परिणामों का लाभ सभी तक नहीं पहुंच पाता।आवश्यकता है कि हर कोशिश के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोग जानें। CEC (Consortium  for Educational Communication) व्यास टीवी पर अलग-अलग विषयों पर हिन्दी और अंग्रेजी दोनों माध्यम में विशेषज्ञों के वीडियो व्याख्यान उपलब्ध करानाContinue reading “दर्शन शास्त्र पर हिन्दी में व्याख्यान”

धर्म दर्शन की रूप-रेखा, लेखक -हरेन्द्र प्रसाद सिन्हा 

यह पुस्तक धर्म दर्शन से जुड़ी विभिन्न समस्याओं का तुलनात्मक एवं आलोचनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करती है।लेखक ने दर्शन शास्त्र विषय के छात्रों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर पढ़ाये जाने वाली धर्म-दर्शन से सम्बंधित विषय-वस्तु को एक पुस्तक में समाहित करने की सार्थक कोशिश की है।इस पुस्तक के दोContinue reading “धर्म दर्शन की रूप-रेखा, लेखक -हरेन्द्र प्रसाद सिन्हा “

टॉपिक- परिभाषा (Definitions)B.A. (Hons) philosophy, 3rd semester, B.A.(prog.) 6th semester, SEC- Critical Thinking

आपने ऐसे वाक्य कई बार सुने होंगे-#”मेरे कहने का अर्थ ये नहीं था।”#”आपने मेरी बातों को अन्य अर्थ में लिया।”#”मेरी बात को तरोड़- मरोड़ कर पेश किया।”#”उसने अपनी बात कहने में ऐसे शब्दों का प्रयोग किया, जिससे सुनने वाला अपने अनुसार अर्थ निकाल सकता है।”#”एक ही शब्द के कई मायने हो सकते है,ये तो इसContinue reading “टॉपिक- परिभाषा (Definitions)B.A. (Hons) philosophy, 3rd semester, B.A.(prog.) 6th semester, SEC- Critical Thinking”

प्लेटो रचित “द रिपब्लिक” एवं “द अपोलॉजी ऑफ सुकरात”

प्लेटो रचित “द रिपब्लिक” एवं “द अपोलॉजी ऑफ सुकरात” दोनों ही पुस्तक दर्शन शास्त्र  जगत में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।दोनों का हिन्दी अनुवाद अब आप kindle पर  पढ़ सकते हैं और amazon से मंगा भी सकते हैं। दोनों पुस्तकों की विषय -वस्तु के बारे में संक्षिप्त में: The Republic “द रिपब्लिक”  रिपब्लिक प्लेटो द्वारा 380 ई.पू. के आसपासContinue reading “प्लेटो रचित “द रिपब्लिक” एवं “द अपोलॉजी ऑफ सुकरात””

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Contact Email: preetijain104@gmail.com

6 thoughts on “

  1. Really it’s very good initiative, specifically for hindi medium students and readers, so I would like to thanks, to dr.preeti Jain. Where ever my need in this, will with you.

    Liked by 1 person

  2. Mamdam aapke pass स्त्री उपेक्षिता बुक मिल सकती हो तो बताइए या किसी के पास हो तो plz contact number send Kar do
    My contact number 9754966866

    Like

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