मिलिन्द – प्रश्न

सम्राट मीनान्डर और नागसेन का यह प्रसिद्ध संवाद सागलपुर ( वर्तमान स्यालकोट ) मे हुआ था जो उस समय सम्राट मीनान्डर की राजधानी थी । इस ग्रंथ मे राजा मिनान्डर ने भिक्खु नागसेन से अनेक ऐसे प्रशन पूछॆ है जो सीधे मनुष्य के मनोविज्ञान से संबध रखते हैं’मिलिन्द प्रशन ’ में भिक्षु नागसेन ने बुद्धContinue reading “मिलिन्द – प्रश्न”

धर्म दर्शन की रूप-रेखा, लेखक -हरेन्द्र प्रसाद सिन्हा 

यह पुस्तक धर्म दर्शन से जुड़ी विभिन्न समस्याओं का तुलनात्मक एवं आलोचनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करती है।लेखक ने दर्शन शास्त्र विषय के छात्रों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर पढ़ाये जाने वाली धर्म-दर्शन से सम्बंधित विषय-वस्तु को एक पुस्तक में समाहित करने की सार्थक कोशिश की है।इस पुस्तक के दोContinue reading “धर्म दर्शन की रूप-रेखा, लेखक -हरेन्द्र प्रसाद सिन्हा “

प्लेटो रचित “द रिपब्लिक” एवं “द अपोलॉजी ऑफ सुकरात”

प्लेटो रचित “द रिपब्लिक” एवं “द अपोलॉजी ऑफ सुकरात” दोनों ही पुस्तक दर्शन शास्त्र  जगत में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।दोनों का हिन्दी अनुवाद अब आप kindle पर  पढ़ सकते हैं और amazon से मंगा भी सकते हैं। दोनों पुस्तकों की विषय -वस्तु के बारे में संक्षिप्त में: The Republic “द रिपब्लिक”  रिपब्लिक प्लेटो द्वारा 380 ई.पू. के आसपासContinue reading “प्लेटो रचित “द रिपब्लिक” एवं “द अपोलॉजी ऑफ सुकरात””

Existentialism Is Humanism (अस्तित्ववाद मानववाद है) -ज्यां पाल सार्त्र

दिल्ली विश्वविद्यालय के B.A. (Hons) 2nd Yr, में एक पेपर Text of Western Philosophy’ निर्धारित है।जिसके स्लेबस का पहला टॉपिक सार्त्र की यह पुस्तक है।1946 में सार्त्र ने एक भाषण दिया जो एक किताब Existentialism Is Humanism (अस्तित्ववाद मानववाद है) के रुप में सामने आया ।  इसमें उन्होंने इस बात को सामने रखा कि अस्तित्त्ववाद मानवता विरोधीContinue reading “Existentialism Is Humanism (अस्तित्ववाद मानववाद है) -ज्यां पाल सार्त्र”

प्रभा खेतान की “स्त्री उपेक्षिता” , द सेकेंड सेक्स किताब का हिंदी रूपांतरण

” स्त्री पैदा नहीं होती वरन बना दी जाती है”बी.ए. (Hons.) प्रथम वर्ष, GE- Ethics in Public Domain कोर्स में एक टॉपिक लेखिका सिमोन द बउआर( Simone De Beauvoir)   द्वारा  लिखित “द सेकेंड सेक्स”  वॉल्यूम 2 का 5वाँ पाठ ” The Married Woman” है। प्रभा खेतान की “स्त्री उपेक्षिता” ,  द सेकेंड सेक्स किताब का हिंदी रूपांतरण है। छात्रContinue reading “प्रभा खेतान की “स्त्री उपेक्षिता” , द सेकेंड सेक्स किताब का हिंदी रूपांतरण”

भाषा दर्शन और लुडविग विटगेंस्‍टाईन

पाश्चात्य भाषा दर्शन को समझना हो तो लुडविग विटगेंस्‍टाईन की कृतियों  ट्रैक्‍टेटस लॉजिको फिलोसफिकस, फिलोसोफीकल इनवेस्टीगेटन, ऑन सेर्टेनिटी को समझ लेना अनिवार्य हो जाता है।भारतीय मूल के हिन्दी भाषी छात्रों के लिये अगर पुस्तकों का हिन्दी रूपांतरण उपलब्ध ना हो तो उन्हें या तो सेकेंडरी सोर्स पर ही निर्भर रहना पड़ता है,या फिर अंग्रेजी में पढ़ना पड़ताContinue reading “भाषा दर्शन और लुडविग विटगेंस्‍टाईन”

योग: आत्म-अनुभूति का एक मार्ग (मोनिका शिवहरे)

यह पुस्तक मेरी सहकर्मी और मित्र मोनिका शिवहरे ने बी•ए• के SEC पेपर ‘योग फिलोसोफी ‘के स्लेबस को ध्यान में रखते हुए लिखी है।लेखिका ने पुस्तक में योग से जुड़े अनेक विचारों और पहलुओं को गहरायी के साथ सारगर्भित तरीके से सामने रखा है। पुस्तक की लम्बाई (पेज़ संख्या) सीमित होने से विद्यार्थियों के लियेContinue reading “योग: आत्म-अनुभूति का एक मार्ग (मोनिका शिवहरे)”

समाज और राजनीति दर्शन एवं धर्म दर्शन-डॉ•रमेंद्र

समाज और राजनीति दर्शन(social and political philosophy) एवं धर्म दर्शन(philosophy of religion) यह किताब वैसे तो विशेष तौर से लोक सेवा आयोग(UPSC) के सिविल सेवा के परीक्षार्थियों के लिये लिखी गयी है,लेकिन यह दर्शनशास्त्र के बी•ए• (आनर्स) के विद्यार्थियों और दर्शनशास्त्र में रुचि रखने वाले सामान्य पाठकों के लिये भी उपयोगी है। इस पुस्तक मेंContinue reading “समाज और राजनीति दर्शन एवं धर्म दर्शन-डॉ•रमेंद्र”

तत्त्वमीमांसा एवं ज्ञानमीमांसा -प्रो. केदारनाथ तिवारी

दर्शन के अध्यन क्षेत्र से जुड़े दो विषयों तत्त्वमीमांसा(Metaphysics) एवं ज्ञानमीमांसा( Epistemology) की समझ बढ़ाने के लिये एक बेहतरीन पुस्तक। इस पुस्तक में भारतीय एवं पाश्चात्य दर्शन के तत्त्वमीमांसा और ज्ञानमीमांसा संबंधी मूल सिद्धांतों का विवेचन लेखक के गहन अध्यन और समझ को दर्शाता है। दर्शन शास्त्र के विद्यार्थीयों को अलग- अलग स्तर पर पढ़ायेContinue reading “तत्त्वमीमांसा एवं ज्ञानमीमांसा -प्रो. केदारनाथ तिवारी”

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