दिनांग और धर्मकीर्ति ( बौद्ध दर्शन) के प्रत्यक्ष प्रमाण पर विचार

भारतीय दर्शन में चेतना का सिद्धान्त ( Indian Theories of Consciousness)

INDIAN THEORIES OF CONSCIOUSNESS CBCS, Delhi University, B. A. (HONS.) (DISCIPLINE SPECIFIC COURSE) 6th Semester यूनिट के प्रत्येक टॉपिक को हिन्दी में पढ्ने के लिये, टॉपिक के बाद दिये लिंक पर क्लिक करें। UNIT-I  1. Kaṭhopaniṣad: Chapter. 1 Valli I, II & III; Kaṭhopaniṣad in “Ekadasepansodan”. Ed. by V. S. Sastri, Motilal Banarsidas, Delhi, 1966. कथाContinue reading “भारतीय दर्शन में चेतना का सिद्धान्त ( Indian Theories of Consciousness)”

अर्थक्रियाकारित्व

बौद्ध दर्शन अनुसार अर्थक्रियाकारित्व किसी वस्तु की सत्ता का लक्षण है ‘अर्थक्रियाकारित्व’ अर्थात् किसी कार्य को उत्पन्न करने की शक्ति अर्थात् कार्योत्पादन सामर्थ्य वर्तमान भूत से जन्य या उत्पन्न है अर्थात् भूत वर्तमान को उत्पन्न करने में शक्त या समर्थ है।बौद्धों ने सत्ता का यह लक्षण क्षणिकता की सिद्धि के लिए किया है। • ज्ञानContinue reading “अर्थक्रियाकारित्व”

धर्मकीर्ति विरचित न्याय बिन्दु

Text of Indian Philosophy, B.A. (Hons) Philosophy, 4th semester, Delhi University न्यायबिन्दु के विषय सम्यक् प्रमाण का महत्व, उसके लक्षणों का विवेचन। Audio- Preeti Jain https://drive.google.com/file/d/1QbRHgsGVACcR3FZ5q6VBjW84WM6yhT18/view?usp=drivesdk

धर्मकीर्ति विरचित न्यायबिन्दु

B.A. (Hons) Philosophy, 4th semester, DUप्रमा, प्रमाण, प्रमेय, प्रमाता, सम्यक् ज्ञान की हिन्दी में व्याख्या- प्रीति जैन https://drive.google.com/file/d/1QNGqSUaAgsbhhRN45HiM4Qfj5ZQbN3ni/view?usp=drivesdk

जैन दर्शन में योग B.A.(P), 4th semester, SEC- Yoga Philosophy

जैन दर्शन में योग के सिद्धांत को समझने के लिए इंटरनेट पर उपलब्ध सहायक सामग्रीविडियो-1* ‘Yoga in Jainism’ part of the film “History of Yoga”जैन धर्म में योग ( फिल्म “योग का इतिहास” का एक अंश)https://youtu.be/pgpVGWOJuk0 2* “शंका समाधान” प्रोग्राम में जैन मुनि प्रमाणसागर जी द्वारा “जैन दर्शन में  योग व ध्यान”  से संबंधित प्रश्न का आगम समत्तContinue reading “जैन दर्शन में योग B.A.(P), 4th semester, SEC- Yoga Philosophy”

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