बिना ज़्यादा जटिल शब्दों के, हुसर्ल का “ईपोके” ( epoche)एक तरीका है जिससे हम बिना किसी पूर्व ज्ञान के या पूर्वाग्रह के वस्तु को एक नई वस्तु की तरह देखने की कोशिश करते हैं। इससे हम उस विशेष चीज़ को सबकुछ नए दृष्टिकोण से देख पाते हैं, जैसे कि हम उसे पहली बार देख रहे हों।
इस तरीके का उपयोग करके हम चीज़ों को अधिक विचारपूर्ण और स्पष्ट दृष्टिकोण से देख सकते हैं, जो हमें उनकी असली तथ्यात्मकता को समझने में मदद करता है।
सोचो कि तुम एक दिन जंगल में चल रहे हो, और वहाँ एक घोड़ा दिखाई देता है। तुमने कई घोड़ों को पहले भी देखा है और जानते हो कि घोड़े कैसे दिखते हैं। लेकिन यह घोड़ा तुम्हारे लिए नया है, तो तुम उसे “ईपोके” का उपयोग करके देख सकते हो। इसका मतलब है कि तुम उस घोड़े के बारे में पहले के सभी ज्ञान को एक तरफ़ रखकर, उसे नए दृष्टिकोण से देखोगे, जैसे कि तुमने उसे कभी पहले नहीं देखा हो। तुम उसकी रंगिनी, संरचना और तरीके से जो चीज़ें देखोगे, वो तुम्हें उसके बारे में नए और गहरे ज्ञान का अहसास कराएगी।
एक और उदाहरण सोचो कि तुम अपने कमरे में बैठे हो और तुम्हारे सामने एक किताब रखी हुई है। तुमने कई बार किताबें पढ़ी हैं और तुम्हारे पास किताबों के बारे में जानकारी है। लेकिन अब तुम उस किताब को “ईपोके” का उपयोग करके पढ़ने की कोशिश करो। तुम उस किताब की पन्नों को एक नए दृष्टिकोण से पढ़ोगे, जैसे कि तुमने पहली बार उसे खोला हो। तुम उस किताब में नए विचार, नए आदर्श और नए संदेश ढूंढ सकते हो, जिन्हें तुम पहले नहीं देख पाए थे।
इन उदाहरणों से यह समझने में मदद हो सकती है कि “ईपोके” कैसे हमें विचारों और ज्ञान को नए दृष्टिकोण से देखने में मदद कर सकता है।