टॉपिक- परिभाषा (Definitions)B.A. (Hons) philosophy, 3rd semester, B.A.(prog.) 6th semester, SEC- Critical Thinking

आपने ऐसे वाक्य कई बार सुने होंगे-#”मेरे कहने का अर्थ ये नहीं था।”#”आपने मेरी बातों को अन्य अर्थ में लिया।”#”मेरी बात को तरोड़- मरोड़ कर पेश किया।”#”उसने अपनी बात कहने में ऐसे शब्दों का प्रयोग किया, जिससे सुनने वाला अपने अनुसार अर्थ निकाल सकता है।”#”एक ही शब्द के कई मायने हो सकते है,ये तो इसContinue reading “टॉपिक- परिभाषा (Definitions)B.A. (Hons) philosophy, 3rd semester, B.A.(prog.) 6th semester, SEC- Critical Thinking”

प्लेटो रचित “द रिपब्लिक” एवं “द अपोलॉजी ऑफ सुकरात”

प्लेटो रचित “द रिपब्लिक” एवं “द अपोलॉजी ऑफ सुकरात” दोनों ही पुस्तक दर्शन शास्त्र  जगत में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।दोनों का हिन्दी अनुवाद अब आप kindle पर  पढ़ सकते हैं और amazon से मंगा भी सकते हैं। दोनों पुस्तकों की विषय -वस्तु के बारे में संक्षिप्त में: The Republic “द रिपब्लिक”  रिपब्लिक प्लेटो द्वारा 380 ई.पू. के आसपासContinue reading “प्लेटो रचित “द रिपब्लिक” एवं “द अपोलॉजी ऑफ सुकरात””

Cognitive Biases ( संज्ञात्मक पूर्वाग्रह)

B.A.(H) Philosophy, 3rd semester, B.A(P) phil Discipline,  6th semester SEC- Critical Thinking, Delhi University Topic : Cognitive Biases ( संज्ञात्मक पूर्वाग्रह) स्थिति 1 अगर हमें  या हमारे समूह के किसी व्यक्ति को सफ़लता मिलती है,तो हम इसे कठिन परिश्रम का परिणाम मानते हैं ।वहीं अगर किसी दूसरे व्यक्ति या अन्य समूह से सम्बंधित व्यक्ति कोContinue reading “Cognitive Biases ( संज्ञात्मक पूर्वाग्रह)”

Existentialism Is Humanism (अस्तित्ववाद मानववाद है) -ज्यां पाल सार्त्र

दिल्ली विश्वविद्यालय के B.A. (Hons) 2nd Yr, में एक पेपर Text of Western Philosophy’ निर्धारित है।जिसके स्लेबस का पहला टॉपिक सार्त्र की यह पुस्तक है।1946 में सार्त्र ने एक भाषण दिया जो एक किताब Existentialism Is Humanism (अस्तित्ववाद मानववाद है) के रुप में सामने आया ।  इसमें उन्होंने इस बात को सामने रखा कि अस्तित्त्ववाद मानवता विरोधीContinue reading “Existentialism Is Humanism (अस्तित्ववाद मानववाद है) -ज्यां पाल सार्त्र”

प्रभा खेतान की “स्त्री उपेक्षिता” , द सेकेंड सेक्स किताब का हिंदी रूपांतरण

” स्त्री पैदा नहीं होती वरन बना दी जाती है”बी.ए. (Hons.) प्रथम वर्ष, GE- Ethics in Public Domain कोर्स में एक टॉपिक लेखिका सिमोन द बउआर( Simone De Beauvoir)   द्वारा  लिखित “द सेकेंड सेक्स”  वॉल्यूम 2 का 5वाँ पाठ ” The Married Woman” है। प्रभा खेतान की “स्त्री उपेक्षिता” ,  द सेकेंड सेक्स किताब का हिंदी रूपांतरण है। छात्रContinue reading “प्रभा खेतान की “स्त्री उपेक्षिता” , द सेकेंड सेक्स किताब का हिंदी रूपांतरण”

भाषा दर्शन और लुडविग विटगेंस्‍टाईन

पाश्चात्य भाषा दर्शन को समझना हो तो लुडविग विटगेंस्‍टाईन की कृतियों  ट्रैक्‍टेटस लॉजिको फिलोसफिकस, फिलोसोफीकल इनवेस्टीगेटन, ऑन सेर्टेनिटी को समझ लेना अनिवार्य हो जाता है।भारतीय मूल के हिन्दी भाषी छात्रों के लिये अगर पुस्तकों का हिन्दी रूपांतरण उपलब्ध ना हो तो उन्हें या तो सेकेंडरी सोर्स पर ही निर्भर रहना पड़ता है,या फिर अंग्रेजी में पढ़ना पड़ताContinue reading “भाषा दर्शन और लुडविग विटगेंस्‍टाईन”

Patanjali Philosophy (दर्शनशास्त्र) Notes in Hindi (IAS PCS UPPCS)

पतांजलि इंस्टिट्यूट द्वारा तैयार दर्शन शास्त्र के हिन्दी में नोटस। 202पेज में पाश्चात्य दर्शन के मुख्य दार्शनिक विचारों काआसान भाषा में व्याख्यान। पुस्तक में निम्नलिखित दार्शनिकों के विचारों को प्रस्तुत किया गया है। 1• देकार्त,स्पिनोज़ा,लाइबनिज़ 2• मूर,रसेल, विटगेंसटाइन 3• लॉक, बर्कले, ह्यूम 4• काण्ट 5• कीकेर्गार्ड, सार्त्र, हाईडेगर 6• प्लटो,अरस्तू 7• स्ट्रासन, क्वाइन Download करेContinue reading “Patanjali Philosophy (दर्शनशास्त्र) Notes in Hindi (IAS PCS UPPCS)”

योग: आत्म-अनुभूति का एक मार्ग (मोनिका शिवहरे)

यह पुस्तक मेरी सहकर्मी और मित्र मोनिका शिवहरे ने बी•ए• के SEC पेपर ‘योग फिलोसोफी ‘के स्लेबस को ध्यान में रखते हुए लिखी है।लेखिका ने पुस्तक में योग से जुड़े अनेक विचारों और पहलुओं को गहरायी के साथ सारगर्भित तरीके से सामने रखा है। पुस्तक की लम्बाई (पेज़ संख्या) सीमित होने से विद्यार्थियों के लियेContinue reading “योग: आत्म-अनुभूति का एक मार्ग (मोनिका शिवहरे)”

समाज और राजनीति दर्शन एवं धर्म दर्शन-डॉ•रमेंद्र

समाज और राजनीति दर्शन(social and political philosophy) एवं धर्म दर्शन(philosophy of religion) यह किताब वैसे तो विशेष तौर से लोक सेवा आयोग(UPSC) के सिविल सेवा के परीक्षार्थियों के लिये लिखी गयी है,लेकिन यह दर्शनशास्त्र के बी•ए• (आनर्स) के विद्यार्थियों और दर्शनशास्त्र में रुचि रखने वाले सामान्य पाठकों के लिये भी उपयोगी है। इस पुस्तक मेंContinue reading “समाज और राजनीति दर्शन एवं धर्म दर्शन-डॉ•रमेंद्र”

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