भाषा दर्शन और लुडविग विटगेंस्‍टाईन

पाश्चात्य भाषा दर्शन को समझना हो तो लुडविग विटगेंस्‍टाईन की कृतियों  ट्रैक्‍टेटस लॉजिको फिलोसफिकस, फिलोसोफीकल इनवेस्टीगेटन, ऑन सेर्टेनिटी को समझ लेना अनिवार्य हो जाता है।भारतीय मूल के हिन्दी भाषी छात्रों के लिये अगर पुस्तकों का हिन्दी रूपांतरण उपलब्ध ना हो तो उन्हें या तो सेकेंडरी सोर्स पर ही निर्भर रहना पड़ता है,या फिर अंग्रेजी में पढ़ना पड़ता है। जिसमें एक अधुरी सी समझ ही बनती है। 
प्रो• अशोक वोहरा की मेहनत और अथक प्रयास का ही परिणाम है कि उन्होनें विटगेंस्‍टाइन की चार कृतियों( ऊपर लिखी तीन के अलावा Culture and Value) का हिन्दी अनुवाद कर प्रकाशित करा दर्शन के क्षेत्र में एक विशेष योगदान दिया है।इनमें से तीन पुस्तकें ICPR से प्रकाशित हुई हैं और ‘ट्रैक्‍टेटस’ भारतीय ज्ञानपीठ से। मेरा सौभाग्य रहा कि  मुझे इनमें से तीन किताबें प्रो• वोहरा से पढ़ने का मौका मिला।
 नीचे इन पुस्तकों को ऑनलाइन ऑर्डर कर मंगाने के लिये लिंक दिये हैं। ये पुस्तकें दिल्ली विश्वविद्यालय की सेन्ट्रल लाइब्रेरी में भी उपलब्ध हैं।
1• Philosophical Investigations (1996)
https://www.exoticindiaart.com/m/book/details/philosophical-investigations-old-book-NZU138/
2• On Certainty (1998)
https://www.amazon.com/On-Certainty/dp/8185636397
3• Culture and Value (1998) – 
https://www.amazon.com/Ludwig-Wittgenstein-Culture-Value/dp/8185636389the three are published by ICPR; and 

4• Tractatus Logico Philosophicus (2016, Bhartiya Jananpitha).
https://www.amazon.in/LUDWIG-WITTGENSTEIN-LOGICO-PHILOSOPHICUS-Ashok-Vohra/dp/9326354784/ref=mp_s_a_1_9?qid=1580732028&refinements=p_27%3AAshok+Vohra&s=books&sr=1-9Presently showing out of stock.

Patanjali Philosophy (दर्शनशास्त्र) Notes in Hindi (IAS PCS UPPCS)

पतांजलि इंस्टिट्यूट द्वारा तैयार दर्शन शास्त्र के हिन्दी में नोटस।

202पेज में पाश्चात्य दर्शन के मुख्य दार्शनिक विचारों काआसान भाषा में व्याख्यान। पुस्तक में निम्नलिखित दार्शनिकों के विचारों को प्रस्तुत किया गया है।

1• देकार्त,स्पिनोज़ा,लाइबनिज़

2• मूर,रसेल, विटगेंसटाइन

3• लॉक, बर्कले, ह्यूम

4• काण्ट

5• कीकेर्गार्ड, सार्त्र, हाईडेगर

6• प्लटो,अरस्तू

7• स्ट्रासन, क्वाइन

Download करे >>https://www.upsctaiyari.com/2019/07/patanjali-philosophy-notes-in-hindi-ias.html

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योग: आत्म-अनुभूति का एक मार्ग (मोनिका शिवहरे)

यह पुस्तक मेरी सहकर्मी और मित्र मोनिका शिवहरे ने बी•ए• के SEC पेपर ‘योग फिलोसोफी ‘के स्लेबस को ध्यान में रखते हुए लिखी है।लेखिका ने पुस्तक में योग से जुड़े अनेक विचारों और पहलुओं को गहरायी के साथ सारगर्भित तरीके से सामने रखा है। पुस्तक की लम्बाई (पेज़ संख्या) सीमित होने से विद्यार्थियों के लिये इसे एक समय सीमा में पुरा पढ़ जाना भी आसान है। लेखिका के शब्दों में कहुँ तो इस पुस्तक क एक द्वित्तीय लक्ष्य योगाभ्यास के एकमात्र उद्देश्य ‘आत्मानुभूति ‘को स्पष्ट करना भी है।

समाज और राजनीति दर्शन एवं धर्म दर्शन-डॉ•रमेंद्र

समाज और राजनीति दर्शन(social and political philosophy) एवं धर्म दर्शन(philosophy of religion)

यह किताब वैसे तो विशेष तौर से लोक सेवा आयोग(UPSC) के सिविल सेवा के परीक्षार्थियों के लिये लिखी गयी है,लेकिन यह दर्शनशास्त्र के बी•ए• (आनर्स) के विद्यार्थियों और दर्शनशास्त्र में रुचि रखने वाले सामान्य पाठकों के लिये भी उपयोगी है। इस पुस्तक में दर्शन शास्त्र विषय के अध्यन क्षेत्र से जुड़े तीन विषयों के मुख्य टॉपिक विस्तार से समझाए गये हैं।

तत्त्वमीमांसा एवं ज्ञानमीमांसा -प्रो. केदारनाथ तिवारी

दर्शन के अध्यन क्षेत्र से जुड़े दो विषयों तत्त्वमीमांसा(Metaphysics) एवं ज्ञानमीमांसा( Epistemology) की समझ बढ़ाने के लिये एक बेहतरीन पुस्तक। इस पुस्तक में भारतीय एवं पाश्चात्य दर्शन के तत्त्वमीमांसा और ज्ञानमीमांसा संबंधी मूल सिद्धांतों का विवेचन लेखक के गहन अध्यन और समझ को दर्शाता है। दर्शन शास्त्र के विद्यार्थीयों को अलग- अलग स्तर पर पढ़ाये जाने वाले विभिन्न पहलुओं की पठन सामग्री एक ही पुस्तक में उपलब्ध हो जाती है।इस पुस्तक का प्रकाशन मोतीलाल बनारसीदास प्रकाशन से हुआ है।