दिनांग और धर्मकीर्ति ( बौद्ध दर्शन) के प्रत्यक्ष प्रमाण पर विचार

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अर्थक्रियाकारित्व

बौद्ध दर्शन अनुसार अर्थक्रियाकारित्व किसी वस्तु की सत्ता का लक्षण है ‘अर्थक्रियाकारित्व’ अर्थात् किसी कार्य को उत्पन्न करने की शक्ति अर्थात् कार्योत्पादन सामर्थ्य वर्तमान भूत से जन्य या उत्पन्न है अर्थात् भूत वर्तमान को उत्पन्न करने में शक्त या समर्थ है।बौद्धों ने सत्ता का यह लक्षण क्षणिकता की सिद्धि के लिए किया है। • ज्ञानContinueContinue reading “अर्थक्रियाकारित्व”

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